झारखण्ड के प्राचीन राजवंश (part - 1) | Ancient Dynasties of Jharkhand
झारखण्ड के प्राचीन राजवंश
मुंडा राज :
झारखण्ड में राज्य निर्माण की प्रकिर्या स्वर्प्रथम मुंडा जनजाति के लोगो ने शुरु की |
रिता / रिसा मुंडा प्रथम जनजाति मुंडा नेता था , जिसने राज्य निर्माण की प्रकिर्या शुरु की |
रिता / रिसा मुंडा ने सुतिया पहान को मुंडाओं का शासक चुना |
रिता / रिसा मुंडा ने नये राज्य का नाम सुतिया नागखंड रखा |
सुतिया के राज्य 7 गढ़ एवं 21 परगनों में विभक्त था |
नागवंशी राजवंश :
नागवंशी राज्य की स्थापना प्रथम शताब्दी में की गई थी |
नागवंशी राज्य की स्थापना फणिमुकुट राय ने की थी |
फणिमुकुट राय प्रथम नागवंशी राजा थे |
फणिमुकुट राय के राज्य में 66 परगने थे |
फणिमुकुट राय ने सुतियाम्बे को अपनी राजधानी बनाया था |
फणिमुकुट राय को नागवंश का आदिपुरुष माना जाता है |
फणिमुकुट राय पुंडरिक नाग एवं वाराणसी की ब्राह्मण कन्या पार्वती के पुत्र थे |
फणिमुकुट राय का विवहा पंचेत के गोवंशीय राजपूत घराने में हुआ था |
फणिमुकुट राय के दीवान पांडे भवराय श्रीवास्तव थे |
नागवंशी राजा प्रताप राय ने अपनी राजधानी सुतियाम्बे से बदलकर चुटिया कर ली |
चुटिया स्वर्ण रेखा नदी के तट पर बसा था |
नागवंशी राजा भीम कर्ण ने खुखरा को अपनी राजधानी बनाया |
नागवंशी राजा भीम कर्ण ने भीम सागर का निर्माण करवाया था |
नागवंशी राजा भीम कर्ण को सरगुजा के हेहयवंशी रक्सेल राजा के साथ युद्ध करना पड़ा |
नागवंशी राजा भीम कर्ण बरवा की लड़ाई में विजय हुआ |
नागवंशी राजा भीम कर्ण कप बरवा की लड़ाई में लुट के रूप में वासुदेव की एक मूर्ति प्राप्त हुई |
रांची सिथ्त जगन्नाथ मंदिर का निर्माण नागवंशी राजा ऐनी शाह द्वारा कराया गया था |
1691 ई. में नागवंशी शासक ऐनी शाह द्वारा जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था |
नागवंशी राजा ऐनी शाह ने स्वर्ण रेखा के समीप सतरंजी में अपना राजधानी स्थापित की थी |
नागवंशी शासक दुर्जन शाह ने दोइसा को अपनी राजधानी बनाया |
नागवंशी शासक दुर्जन शाह ने दोइसा में नवरत्तनगढ़ राजप्रसाद का निर्माण कराया था |
नागवंशी शासक जगन्नाथ शाहदेव ने भोंरों को अपनी राजधानी बनाया था |
नागवंशी शासक यदुनाथ शाह ने पालकोट को अपनी राजधानी बनाया |
नागवंशी शासक प्रताप उदयनाथ शाहदेव की राजधानी रतुगढ़ थी |
नागवंशी शासक राजाओ की राजधानी का सही क्रम : सुतियाम्बे , चुटिया , खुखरा , दोइसा , पालकोट , एवं रतुगढ़ है
शिवदास कर्ण नामक नागवंशी राजा ने हप्पामुनी मंदिर ( घाघरा ) का निर्माण कराया था |
नागवंशी शासक चिंतामणि शरणनाथ शाहदेव के शासन काल में जमींदारी उन्मूलन हुआ |
रक्सैल राजवंश :
पलामू में प्रारंभ में रक्सैल राजवंश का आधिपत्य था |
रक्सैल वंश के लोग स्वंय को राजपूत कहते थे |
रक्सैल राजवंश के लोग चेरो द्वारा अपदस्थ किये गये |
चेरो राजवंश :
भागवत राय द्वारा पलामू में चेरो वंश की स्थापना की गई थी |
मेदिनी राय सर्वाधिक प्रतापी चेरो शासक था | इसके शासन काल में चेरो राज वंश का " स्वर्णयुग " कहा गया है |
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